Aur Vrat Vrat

हरियाली तीज

परंपरा के अनुसार इसी तिथि को शिव-पार्वती का विवाह हुआ था, इसीलिए यह तीज विवाह-उत्सव का पर्व है। कथा इस प्रकार है, पार्वती जी ने शिव को पति रूप में पाने के लिए अ…

हरियाली तीज व्रत

देवता

माँ पार्वती एवं भगवान शिव

तिथि / समय

श्रावण शुक्ल तृतीया

श्रेणी

Aur Vrat व्रत

व्रत का परिचय

परंपरा के अनुसार इसी तिथि को शिव-पार्वती का विवाह हुआ था, इसीलिए यह तीज विवाह-उत्सव का पर्व है। कथा इस प्रकार है, पार्वती जी ने शिव को पति रूप में पाने के लिए अनेक जन्मों तक तप किया। अंतिम जन्म में हिमालय की पुत्री के रूप में उन्होंने श्रावण शुक्ल तृतीया को वन में स्वयं बनाए शिवलिंग की पूजा करते हुए घोर व्रत-तप आरंभ किया। वर्षा-ऋतु की कोमल हरियाली में वे निराहार रहतीं, शिव का ध्यान करतीं तथा सखियों के साथ तीज-गीत गातीं।

व्रत विधि

कैसे रखें

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    उपवास (निराहार अथवा फलाहार) रखें। मिट्टी के शिव-पार्वती की स्थापना-पूजा करें, तीज कथा का श्रवण करें तथा झूला-उत्सव में सामूहिक गीत-नृत्य करें। स्त्रियाँ मेहंदी एवं श्रृंगार से सजती हैं, श्रावण की हरियाली के साथ यह पर्व जुड़ा है। वृक्ष (विशेषकर बरगद/नीम) के झूले पर सवारी की परंपरा है। गौरी-पार्वती को सुहाग-सामग्री अर्पित करें तथा संध्या-पारण करें। गाजक-मूंगफली-सत्तू के परंपरागत व्यंजन (क्षेत्रीय) बनाएँ।

पूजा सामग्री

  • मिट्टी के शिव-पार्वती
  • फूल-प्रसाद
  • कथा-पोथी
  • झूला
  • सुहाग-सामग्री
  • मेहंदी
  • गीत-वाद्य

व्रत के नियम

  • व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
  • संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।

पारण विधि

अक्षय सुहाग, पति-मंगल, सौभाग्य-वृद्धि एवं ऋतु-आनंद।

व्रत कथा

परंपरा के अनुसार इसी तिथि को शिव-पार्वती का विवाह हुआ था, इसीलिए यह तीज विवाह-उत्सव का पर्व है। कथा इस प्रकार है, पार्वती जी ने शिव को पति रूप में पाने के लिए अनेक जन्मों तक तप किया। अंतिम जन्म में हिमालय की पुत्री के रूप में उन्होंने श्रावण शुक्ल तृतीया को वन में स्वयं बनाए शिवलिंग की पूजा करते हुए घोर व्रत-तप आरंभ किया। वर्षा-ऋतु की कोमल हरियाली में वे निराहार रहतीं, शिव का ध्यान करतीं तथा सखियों के साथ तीज-गीत गातीं।

शिव जी उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए। श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन उन्होंने पार्वती जी से वर माँगने को कहा। पार्वती ने यही वर माँगा कि उनका विवाह शिव से ही हो। शिव ने अनुमति दी तथा इसी तिथि को विवाह-प्रसंग संपन्न हुआ। तब से स्त्रियों की परंपरा है कि इस दिन पार्वती-शिव की पूजा से सुहाग की सुरक्षा होती है, जो स्त्री विधि से व्रत रखती है, उसे अक्षय सुहाग का वरदान मिलता है।

हरियाली तीज का सांस्कृतिक भाव ऋतु-उत्सव से भी जुड़ा है, श्रावण में धरती हरी-भरी हो जाती है तथा स्त्रियाँ झूलों पर झूलते हुए तीज-गीत गाती हैं। गीतों में गौरी के विवाह का वर्णन, सास-ननद के संबंधों के भाव तथा वर्षा के आगमन का आनंद आता है। कुमारिकाएँ उत्तम वर की कामना से तथा सुहागिनें पति-मंगल की कामना से व्रत रखती हैं।

व्रत का फल लोक-विश्वास के अनुसार सुहाग-रक्षा एवं सौभाग्य-वृद्धि है। पार्वती जी की तप-परंपरा से जुड़ी यह तिथि स्त्री-साधना का प्रतीक बनी। श्रृंगार, मेहंदी एवं हरियारी-भरे वातावरण का यह पर्व धार्मिक एवं सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से उत्तर भारत का प्रमुख लोक-पर्व है।

सामान्य प्रश्न

अक्षय सुहाग, पति-मंगल, सौभाग्य-वृद्धि एवं ऋतु-आनंद।

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