
देवता
तिथि / समय
चैत्र मास की शुक्ल पूर्णिमा
श्रेणी
Aur Vrat व्रत
व्रत का परिचय
हनुमान जयंती की प्रमुख परंपरा; क्षेत्रीय पंचांग-भेद से चैत्र पूर्णिमा के समीप हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन हनुमान जी के जन्म की कथा-परंपरा का स्मरण, व्रत-पूजा एवं सुंदरकांड पाठ विशेष फलदायी माना गया है। क्षेत्रीय पंचांग-आधारित अन्य परंपराएँ (वेदव्यास-जयंति आदि) भी जुड़ी हैं। चैत्र मास की समाप्ति पर वसंत-ऋतु की अंतिम पूर्णिमा के रूप में इसका ऋतु-महत्व भी है।
व्रत विधि
कैसे रखें
- 1
पूजा सामग्री
व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
- संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।
पारण विधि
हनुमान जयंती आदि की क्षेत्रीय/पंचांग-आधारित परंपराएँ
व्रत कथा
हनुमान जयंती की प्रमुख परंपरा; क्षेत्रीय पंचांग-भेद से चैत्र पूर्णिमा के समीप हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन हनुमान जी के जन्म की कथा-परंपरा का स्मरण, व्रत-पूजा एवं सुंदरकांड पाठ विशेष फलदायी माना गया है। क्षेत्रीय पंचांग-आधारित अन्य परंपराएँ (वेदव्यास-जयंति आदि) भी जुड़ी हैं। चैत्र मास की समाप्ति पर वसंत-ऋतु की अंतिम पूर्णिमा के रूप में इसका ऋतु-महत्व भी है।
सामान्य प्रश्न
हनुमान जयंती आदि की क्षेत्रीय/पंचांग-आधारित परंपराएँ
