
देवता
श्री गणेश जी, बुध ग्रह एवं श्रीकृष्ण
तिथि / समय
प्रत्येक बुधवार
श्रेणी
Aur Vrat व्रत
व्रत का परिचय
बुधवार को विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा से कार्य-बाधा दूर होने का महिमा प्रचलित है। कथा-संग्रहों में गणेश पूजा के महात्म्य पर एक प्रसिद्ध लोक-कथा इस प्रकार आती है।
व्रत विधि
कैसे रखें
- 1
हरिद्रा (हल्दी) से गणेश प्रतिमा बनाकर अथवा चित्र से पूजा करें, विशेष रूप से दूर्वा (तिन-पत्ती घास) की अंकुर-समूति अर्पित करें। मोदक अथवा मीठा भोग लगाएँ। हरे वस्त्र धारण करें तथा गणपति अथर्वशीर्ष अथवा गणेश चालीसा का पाठ करें। उपवास अथवा एक समय भोजन का नियम रखें। बुध ग्रह से पीड़ित जातक इस दिन हरे चने, पन्ना अथवा हरी वस्तु का दान करें।
पूजा सामग्री
- हल्दी (हरिद्रा)
- दूर्वा
- मोदक
- फूल
- नारियल
- हरा चंदन
व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
- संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।
पारण विधि
कार्य-सिद्धि, विद्या-वृद्धि, बुध-दोष शांति एवं विघ्न-नाश।
व्रत कथा
बुधवार को विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा से कार्य-बाधा दूर होने का महिमा प्रचलित है। कथा-संग्रहों में गणेश पूजा के महात्म्य पर एक प्रसिद्ध लोक-कथा इस प्रकार आती है।
कथा है कि एक गाँव में एक किसान रहता था, जो कठोर परिश्रम करता था, पर सुख का अनुपात उसके श्रम के साथ नहीं था। जो कार्य वह आरंभ करता, उसमें अधूरापन या विघ्न आ ही जाता। एक बार उसकी फसल पर आंधी आ गई और उसकी गाय बीमार पड़ गई। दुःखी किसान गाँव के बुजुर्ग के पास पहुँचा। बुजुर्ग ने कहा, 'हे वत्स, कार्य का फल श्रम के साथ बुध की विधि से भी जुड़ा होता है। तू प्रति बुधवार हल्दी से गणराज का निर्माण करके दूर्वा अर्पित कर, बुध देव का स्मरण कर और मोदक का भोग लगा। बुधवार को गणपति की कृपा से व्यापार और कर्म में सिद्धि बनी रहती है।' किसान ने यही किया।
सात बुधवार बीतते-बीतते किसान की गाय स्वस्थ हो गई, खेतों में पुनः हरियाली आ गई और उसके दूर के संबंधों से व्यापार का नया अवसर जुड़ा। किसान को विश्वास हो गया कि विघ्नहर्ता की बुधवार-पूजा ने उसके अधूरे कार्यों को पूर्ण किया है। गाँव में उसने गणेश जी की स्थापना कर दी, जिसकी प्रति बुधवार पूजा होने लगी।
परंपरा में बुधवार का संबंध श्रीकृष्ण की उपासना से भी जोड़ा गया है; इसी दिन बुध ग्रह की आराधना का नियम भी है। बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी एवं व्यापार का स्वामी माना गया है, अतः इस दिन हरी वस्तुओं का दान तथा हरे चने का प्रसाद विशेष फलदायी माना गया है। जो छात्र बुधवार व्रत करते हैं, उनकी विद्या एवं स्मरण-शक्ति बढ़ती है; जो व्यापारी करते हैं, उनके धंधे में सिद्धि आती है। दूर्वा का अर्पण इस व्रत का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग है, क्योंकि मुद्गल पुराण की परंपरा में गणेश जी दूर्वा-अर्पण से शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
सामान्य प्रश्न
कार्य-सिद्धि, विद्या-वृद्धि, बुध-दोष शांति एवं विघ्न-नाश।
