
देवता
तिथि / समय
भाद्रपद मास की शुक्ल पूर्णिमा
श्रेणी
Aur Vrat व्रत
व्रत का परिचय
पितृपक्ष आरंभ से संबंधित पंचांग-परंपरा, भाद्रपद पूर्णिमा से श्राद्ध-पक्ष का आरंभ होता है। इस दिन गंगा-स्नान एवं पितृ-तर्पण का विशेष महत्व है। कुछ क्षेत्रों में महालक्ष्मी-परंपरा (बंगाल की महालया सहित) के आरंभ की स्मृतियाँ जुड़ी हैं। अमावस्या तक चलने वाले पितृ-पक्ष का आरंभ-द्वार यह पूर्णिमा मानी जाती है।
व्रत विधि
कैसे रखें
- 1
पूजा सामग्री
व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
- संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।
पारण विधि
पितृपक्ष आरंभ से संबंधित पंचांग-परंपराएँ
व्रत कथा
पितृपक्ष आरंभ से संबंधित पंचांग-परंपरा, भाद्रपद पूर्णिमा से श्राद्ध-पक्ष का आरंभ होता है। इस दिन गंगा-स्नान एवं पितृ-तर्पण का विशेष महत्व है। कुछ क्षेत्रों में महालक्ष्मी-परंपरा (बंगाल की महालया सहित) के आरंभ की स्मृतियाँ जुड़ी हैं। अमावस्या तक चलने वाले पितृ-पक्ष का आरंभ-द्वार यह पूर्णिमा मानी जाती है।
सामान्य प्रश्न
पितृपक्ष आरंभ से संबंधित पंचांग-परंपराएँ
