Ekadashi Vrat

अपरा एकादशी

अपरा एकादशी का महात्म्य पद्म पुराण-परंपरा में युधिष्ठिर के प्रश्न पर कृष्ण द्वारा वर्णित है। इस एकादशी का नाम 'अपरा' (सीमा-रहित) इसलिए रखा गया कि इसका फल अपार म…

अपरा एकादशी व्रत

देवता

भगवान विष्णु

तिथि / समय

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी

श्रेणी

Ekadashi व्रत

व्रत का परिचय

अपरा एकादशी का महात्म्य पद्म पुराण-परंपरा में युधिष्ठिर के प्रश्न पर कृष्ण द्वारा वर्णित है। इस एकादशी का नाम 'अपरा' (सीमा-रहित) इसलिए रखा गया कि इसका फल अपार माना गया। परंपरा के अनुसार यह व्रत व्रती के अनेक जन्मों के संचित पापों का नाश करती है, दुर्भाषण-दोष को शांत करती है तथा छल-कपर के दोष दूर करती है। कथात्मक वर्णन में यह एकादशी स्वर्ण-दान, गौ-दान एवं विद्या-दान के पुण्य के समान फल देने वाली बताई गई है। जो व्यक्ति इस दिन विष्णु-उपासना के साथ निराहार रहता है, उसकी कीर्ति तीनों लोकों में फैलती है तथा उसे अंत में विष्णु-सान्निध्य प्राप्त होता है। ज्येष्ठ की गर्मी में पड़ने वाली यह तिथि तप-संयम का अभ्यास भी कराती है, यह इसका अंतर्निहित उपदेश है।

व्रत विधि

कैसे रखें

  1. 1

पूजा सामग्री

    व्रत के नियम

    • व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
    • संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।

    पारण विधि

    पाप-शमन एवं कीर्ति-वृद्धि की परंपरा

    व्रत कथा

    अपरा एकादशी का महात्म्य पद्म पुराण-परंपरा में युधिष्ठिर के प्रश्न पर कृष्ण द्वारा वर्णित है। इस एकादशी का नाम 'अपरा' (सीमा-रहित) इसलिए रखा गया कि इसका फल अपार माना गया। परंपरा के अनुसार यह व्रत व्रती के अनेक जन्मों के संचित पापों का नाश करती है, दुर्भाषण-दोष को शांत करती है तथा छल-कपर के दोष दूर करती है। कथात्मक वर्णन में यह एकादशी स्वर्ण-दान, गौ-दान एवं विद्या-दान के पुण्य के समान फल देने वाली बताई गई है। जो व्यक्ति इस दिन विष्णु-उपासना के साथ निराहार रहता है, उसकी कीर्ति तीनों लोकों में फैलती है तथा उसे अंत में विष्णु-सान्निध्य प्राप्त होता है। ज्येष्ठ की गर्मी में पड़ने वाली यह तिथि तप-संयम का अभ्यास भी कराती है, यह इसका अंतर्निहित उपदेश है।

    सामान्य प्रश्न

    पाप-शमन एवं कीर्ति-वृद्धि की परंपरा

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