
देवता
भगवान विष्णु
तिथि / समय
भाद्रपद कृष्ण एकादशी
श्रेणी
Ekadashi व्रत
व्रत का परिचय
अजा एकादशी की कथा राजा हरिश्चंद्र के प्रसंग से जुड़ी मानी जाती है। कथा-परंपरा के अनुसार सत्यव्रती राजा हरिश्चंद्र ने विश्वामित्र के शाप-प्रभाव से अपना राज्य, धन तथा स्वयं की स्वतंत्रता तक खो दी। विपरीत परिस्थितियों में उन्हें श्मशान की रक्षा का कार्य करना पड़ा। चंद्रमुखी रूप से वस्त्र-विक्रय करने वाली उनकी पत्नी तारामती भी घोर दुःख में थी। सत्य के प्रति अटल रहते हुए राजा ने धैर्य नहीं छोड़ा, परंतु दुःख की उस सीमा में उन्होंने विष्णु-शरण की प्रार्थना की।
व्रत विधि
कैसे रखें
- 1
पूजा सामग्री
व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
- संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।
पारण विधि
पाप-शमन, हरिश्चंद्र-परंपरा से जुड़ी कथा
व्रत कथा
अजा एकादशी की कथा राजा हरिश्चंद्र के प्रसंग से जुड़ी मानी जाती है। कथा-परंपरा के अनुसार सत्यव्रती राजा हरिश्चंद्र ने विश्वामित्र के शाप-प्रभाव से अपना राज्य, धन तथा स्वयं की स्वतंत्रता तक खो दी। विपरीत परिस्थितियों में उन्हें श्मशान की रक्षा का कार्य करना पड़ा। चंद्रमुखी रूप से वस्त्र-विक्रय करने वाली उनकी पत्नी तारामती भी घोर दुःख में थी। सत्य के प्रति अटल रहते हुए राजा ने धैर्य नहीं छोड़ा, परंतु दुःख की उस सीमा में उन्होंने विष्णु-शरण की प्रार्थना की।
परंपरा के अनुसार तब गौतम ऋषि ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अजा) का व्रत बताया। राजा ने विधिपूर्वक यह व्रत रखा। व्रत के पुण्य-प्रभाव से उनके संचित दुःखों का नाश हुआ, उन्हें अपना राज्य, धन-वैभव एवं पुत्र रोहित की प्राप्ति पुनः हुई तथा स्वयं देवता उनकी सत्य-निष्ठा का सम्मान करने आए। परंपरा में यही कथा अजा एकादशी के महात्म्य से जोड़ी जाती है, जो व्रती यह व्रत रखता है, उसके समस्त पाप नष्ट होते हैं तथा उसकी दुर्गति समृद्धि में परिवर्तित हो जाती है। यह एकादशी करुणा-दृष्टि से विपरीत परिस्थितियों में भी आशा-भाव रखने का उपदेश देती है, सत्य एवं विष्णु-शरण का यही फल है।
सामान्य प्रश्न
पाप-शमन, हरिश्चंद्र-परंपरा से जुड़ी कथा
