Navgraha Mantra

नवग्रह मंत्र

नौ ग्रहों के बीज मंत्र, ग्रह-शांति और दोष-निवारण के लिए।

नवग्रह मंत्र

मंत्र

ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी बाणेः पवाकान्लन-देह धारिणः। अन्यानि चैतानि वपुंगणानि ह्यन्यानि चास्मान् निधनानि सन्ति॥ ॐ आदित्याय च नमः सोमाय च मंगलाय च बुधाय च गुरवे च शुक्राय च शनैश्चराय च राहवे च केतवे च नमः॥

Om Adityaya cha Namah, Somaya cha Mangalaya cha, Budhaya cha Gurave cha, Shukraya cha Shanaishcharaya cha, Rhave cha Ketave cha Namah

देवता

नवग्रह देवता

श्रेष्ठ समय

प्रातः काल; संबंधित ग्रह का दिन (शनि-शनिवार, गुरु-गुरुवार आदि) विशेष।

माला / जाप

प्रत्येक ग्रह के मंत्र का रुद्राक्ष माला पर 108 जाप; साढ़ेसाती में शनि मंत्र का विशेष अनुष्ठान।

मंत्र का अर्थ

भावार्थ

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु, इन नवग्रहों को नमस्कार। वैदिक ज्योतिष में जीवन के सुख-दुःख पर ग्रहों का प्रभाव माना गया है। नवग्रह मंत्रों के जाप से ग्रह-दोष शांत होते हैं और जीवन में संतुलन आता है।

जाप विधि

कैसे जाप करें

  1. 1

    प्रातः स्नान के बाद नवग्रह मंत्रों का जाप करें, शुद्ध अवस्था में।

  2. 2

    सूर्य को जल अर्पित करते हुए सूर्य मंत्र जापें: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।

  3. 3

    प्रत्येक ग्रह का बीज मंत्र 108 या कम से कम 11 बार जापें (नीचे सूची देखें)।

  4. 4

    ग्रह-दोष की स्थिति में संबंधित ग्रह के मंत्र, दान और दिन का विशेष पालन करें।

महात्म्य और परंपरा

पारंपरिक महत्व

नवग्रह बीज मंत्र: सूर्य, ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः; चंद्र, ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः; मंगल, ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः; बुध, ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः; गुरु, ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः; शुक्र, ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः; शनि, ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः; राहु, ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः; केतु, ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः।

ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के ग्रह-दोष (जैसे साढ़ेसाती, कालसर्प, राहु-केतु दोष) की शांति के लिए इन्हीं बीज मंत्रों का जाप बताया गया है। प्रत्येक ग्रह का अपना दिन, रंग और दान है: जाप के साथ उनका पालन और प्रभाव बढ़ता है। नवग्रह की सामूहिक उपासना से समस्त ग्रह शुभ फल देते हैं।

माला और जाप की जानकारी

माला

प्रत्येक ग्रह के मंत्र का रुद्राक्ष माला पर 108 जाप; साढ़ेसाती में शनि मंत्र का विशेष अनुष्ठान।

श्रेष्ठ समय

प्रातः काल; संबंधित ग्रह का दिन (शनि-शनिवार, गुरु-गुरुवार आदि) विशेष।

सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रातः स्नान के बाद सूर्य को जल देते हुए नौों ग्रहों के बीज मंत्र 11-11 या 108-108 बार जापें, विशेष ग्रह-दोष हो तो उस ग्रह का मंत्र अधिक जापें।

इस मंत्र का जाप और धुन Sanatan Seva ऐप में सुनें और गिनें
सभी मंत्रों पर वापस जाएँ