
मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः
Om Dum Durgayei Namah
देवता
माँ दुर्गा
श्रेष्ठ समय
प्रातः या संध्या; नवरात्रि, अष्टमी और मंगलवार-शुक्रवार विशेष।
माला / जाप
रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला पर 108 जाप; नवरात्रि में नित्य 108 या 1008 जाप।
मंत्र का अर्थ
भावार्थ
दुर्गा, जो दुःख-संकट के दुर्ग (किले) जैसी कठिनाईयों को दूर करती हैं: उन माँ को नमस्कार। 'दुं' बीज मंत्र माँ की रक्षा-शक्ति का प्रतीक है। इस मंत्र के जाप से भय, शत्रु-भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
जाप विधि
कैसे जाप करें
- 1
प्रातः स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें, देवी के सामने दीपक जलाएँ।
- 2
लाल पुष्प, सिंदूर और मिठाई का भोग अर्पित करें।
- 3
रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला पर 108 बार जाप करें।
- 4
जाप के बाद दुर्गा सप्तशती या अर्गला-कीलक स्तोत्र का पाठ करें।
महात्म्य और परंपरा
पारंपरिक महत्व
दुर्गा सप्तशती में देवी को महिषासुर सहित समस्त असुरों का नाश करने वाली आदि-शक्ति बताया गया है। इस मंत्र का जाप उसी शक्ति को जागृत करता है: भक्त के भीतर साहस और स्थिरता आती है। नवरात्रि के नौ दिन इस मंत्र का अनुष्ठान विशेष फलदायी माना जाता है।
माँ दुर्गा भक्तों के लिए मातृ-रूप में सहज प्रसन्न होती हैं: कठिन अनुष्ठान की अपेक्षा श्रद्धा-भाव से जाप ही शीघ्र फल देता है। संकट, रोग या भय की स्थिति में इस मंत्र का जाप मन को बल प्रदान करता है।
माला और जाप की जानकारी
माला
रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला पर 108 जाप; नवरात्रि में नित्य 108 या 1008 जाप।
श्रेष्ठ समय
प्रातः या संध्या; नवरात्रि, अष्टमी और मंगलवार-शुक्रवार विशेष।
सामान्य प्रश्न
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवरात्रि के नौ दिन और दुर्गा अष्टमी पर सर्वोत्तम। सामान्य दिनों में मंगलवार या शुक्रवार का प्रातः काल उत्तम है।
