
संपूर्ण कथा
वनवास के दौरान पांडव प्यास से व्याकुल होकर जल की खोज में एक सरोवर तक पहुँचे। सबसे पहले नकुल जल लेने गए तो एक यक्ष ने कहा कि पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो। उन्होंने अनसुना करके जल पिया और गिरकर मर गए। इसी प्रकार सहदेव, अर्जुन और भीम की भी वही दशा हुई।
अंत में युधिष्ठिर वहाँ पहुँचे और यक्ष के प्रश्न सुने। यक्ष ने पूछा कि वायु से तेज कौन है, तो उन्होंने उत्तर दिया कि मन। सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है, तो उन्होंने कहा कि प्रतिदिन प्राणी मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं, फिर भी शेष लोग स्वयं को अमर समझते हैं।
युधिष्ठिर के उत्तरों से यक्ष संतुष्ट हुआ और एक भाई को जीवित करने का वरदान दिया। युधिष्ठिर ने नकुल का नाम लिया, ताकि माता कुंती और माद्री दोनों का एक-एक पुत्र जीवित रहे। इस न्यायपूर्ण निर्णय से प्रसन्न होकर धर्मराज रूपी यक्ष ने चारों भाइयों को जीवित कर दिया।
कथा का संदेश
ज्ञान, विनम्रता और निष्पक्षता मनुष्य को सबसे कठिन परीक्षा में भी सफल बनाती है।
