संपूर्ण कथा
असुर हिरण्याक्ष अत्यंत बलशाली और अहंकारी था। उसने पृथ्वी को समुद्र की गहराइयों में ले जाकर छिपा दिया। सृष्टि संकट में पड़ गई तब ब्रह्माजी ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की।
उसी समय ब्रह्माजी की नासिका से एक छोटा सा वराह (सूअर) प्रकट हुआ, जो देखते ही देखते विशाल रूप में बढ़ गया। भगवान वराह ने समुद्र में प्रवेश करके पृथ्वी को अपने दाँतों पर उठा लिया।
हिरण्याक्ष ने रास्ता रोका और युद्ध किया, पर भगवान वराह ने उसका वध करके पृथ्वी को जल के ऊपर पुनः स्थापित किया। हिरण्याक्ष, हिरण्यकशिपु का ही भाई था।
कथा का संदेश
जब-जब धरती पर संकट आता है, धर्म की रक्षा के लिए शक्ति स्वयं प्रकट होती है।
