
संपूर्ण कथा
लोक परंपरा के अनुसार वाल्मीकि पहले रत्नाकर नामक डाकू थे। नारद मुनि के उपदेश से उनका हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने राम नाम की साधना की। वाल्मीकि रामायण में उन्हें प्रचेता का पुत्र और तपस्वी महर्षि बताया गया है।
एक दिन वाल्मीकि ने नारद से पूछा कि इस समय संसार में सर्वगुण संपन्न मनुष्य कौन है। नारद ने उन्हें श्री राम का चरित्र सुनाया। इसके बाद तमसा नदी के तट पर उन्होंने एक व्याध द्वारा क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को मारते देखा। मादा पक्षी का विलाप सुनकर उनका शोक अपने आप श्लोक रूप में प्रकट हुआ।
ब्रह्माजी ने प्रकट होकर उन्हें इसी छंद में श्री राम की कथा लिखने की प्रेरणा दी और कहा कि संसार में जब तक पर्वत और नदियाँ रहेंगी, तब तक यह कथा रहेगी। इस प्रकार वाल्मीकि आदिकवि और रामायण आदिकाव्य कहलाए।
कथा का संदेश
करुणा से उपजी संवेदना ही सच्ची कविता और महान साहित्य का स्रोत होती है।
