
संपूर्ण कथा
असुर जलंधर महापराक्रमी था और उसकी पत्नी वृंदा परम पतिव्रता थी। वृंदा के पतिव्रत के प्रभाव से जलंधर को कोई पराजित नहीं कर पा रहा था। उसने देवताओं को परास्त कर दिया और अंत में भगवान शिव से भी युद्ध की ठानी।
देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण करके वृंदा का पतिव्रत भंग किया। इसके तुरंत बाद शिवजी ने युद्ध में जलंधर का वध कर दिया। सत्य जानकर वृंदा ने विष्णु को शाप दिया कि तुम पत्थर बन जाओ।
भगवान विष्णु शालिग्राम शिला के रूप में प्रकट हुए। वृंदा ने अग्नि में प्रवेश किया और उसकी राख से तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। भगवान ने उसे वरदान दिया कि तुम सदा मेरे साथ पूजी जाओगी। इसी कारण प्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी विवाह मनाया जाता है।
कथा का संदेश
पतिव्रत और सत्य की शक्ति महान है, पर छल का परिणाम सबके लिए पीड़ादायक होता है।
