
संपूर्ण कथा
स्कंद पुराण के अनुसार नारद मुनि को भगवान विष्णु ने बताया कि सत्यनारायण व्रत से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। साधु नामक वणिक संतान न होने से दुखी था। उसने संकल्प किया कि पुत्री होने पर वह सत्यनारायण का पूजन करेगा। उसके घर कलावती का जन्म हुआ, पर वह पूजा टालता रहा।
कलावती के विवाह के बाद साधु वणिक दामाद के साथ व्यापार यात्रा पर गया। उसने अब भी पूजा नहीं की। राजा के धन की चोरी के आरोप में दोनों को बंदी बना लिया गया और उनका धन भी छिन गया। घर पर भी विपत्ति आ गई।
लीलावती और कलावती ने भगवान सत्यनारायण का व्रत किया। इससे साधु और उसके दामाद को मुक्ति मिली और खोया धन वापस मिला। साधु ने सत्य और नियम से व्रत करने का संकल्प लिया और जीवन भर उसका पालन किया।
कथा का संदेश
ईश्वर के लिए किया गया संकल्प और वचन निभाना सत्य का सबसे बड़ा पालन है।
