
संपूर्ण कथा
लंका के युद्ध में रावण के प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित होकर गिर पड़े। श्री राम व्याकुल हो गए और सारी सेना में शोक छा गया। सुषेण वैद्य ने कहा कि केवल हिमालय पर्वत की विशेष औषधियाँ ही लक्ष्मण को बचा सकती हैं और वे सूर्योदय से पहले लानी होंगी।
जांबवान ने हनुमानजी को इस कार्य के लिए भेजा। वे आकाश मार्ग से उड़कर हिमालय पहुँचे, पर वहाँ अनेक औषधियाँ चमक रही थीं और वे असली औषधि की पहचान नहीं कर सके। तब हनुमानजी ने पूरे पर्वत शिखर को ही उठा लिया।
वे रात बीतने से पहले लंका पहुँचे। सुषेण ने औषधि का प्रयोग किया और लक्ष्मण पुनः स्वस्थ होकर उठ बैठे। राम ने हनुमान को हृदय से लगा लिया और सेना में उत्साह लौट आया।
कथा का संदेश
समर्पण, बुद्धि और तत्परता से असंभव कार्य भी पूर्ण हो सकता है।
