Pauranik Katha

राजा शिबि की शरणागत वत्सलता

शरण में आए कबूतर की रक्षा के लिए अपना मांस देने वाले राजा शिबि की कथा।

राजा शिबि की शरणागत वत्सलता कथा

संपूर्ण कथा

राजा शिबि अपनी दया और धर्मपरायणता के लिए प्रसिद्ध थे। देवताओं ने उनकी परीक्षा लेने का निश्चय किया। इंद्र ने बाज और अग्निदेव ने कबूतर का रूप धारण किया। कबूतर प्राण बचाने के लिए शिबि की गोद में आ बैठा।

बाज ने कहा कि यह मेरा भोजन है, इसे लौटा दो, वरना मैं भूख से मर जाऊँगा। शिबि ने शरण में आए प्राणी को लौटाने से इनकार किया और उसके बदले अपने शरीर का मांस देने का प्रस्ताव रखा।

तराजू के एक पलड़े पर कबूतर और दूसरे पर शिबि अपने शरीर का मांस काटकर रखने लगे, पर कबूतर का पलड़ा भारी ही रहा। अंत में राजा स्वयं तराजू पर बैठ गए। तब इंद्र और अग्निदेव अपने असली रूप में प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया।

कथा का संदेश

शरण में आए की रक्षा करना सर्वोच्च धर्म है।

सामान्य प्रश्न

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