संपूर्ण कथा
राजा सत्यव्रत, जो आगे चलकर वैवस्वत मनु कहलाए, एक दिन नदी में जल अर्पण कर रहे थे। उनकी अंजलि में एक छोटी सी मछली आ गई और उसने अपनी रक्षा की प्रार्थना की। राजा ने उसे अपने कमंडल में रख लिया।
वह मछली बढ़ती गई। उसे कमंडल से घड़े, तालाब, नदी और फिर समुद्र में रखना पड़ा। तब मनु समझ गए कि यह साधारण मछली नहीं, स्वयं भगवान विष्णु हैं। भगवान ने बताया कि सात दिन में महाप्रलय आएगा।
भगवान ने मनु को एक विशाल नौका बनवाने को कहा, जिसमें सप्तर्षि, औषधियाँ, बीज और सभी जीवों के जोड़े रखे गए। प्रलय के समय मत्स्य भगवान ने नौका को सुरक्षित पार लगाया। भागवत के अनुसार उन्होंने वेदों को भी असुर से मुक्त कराया।
कथा का संदेश
संकट के समय विवेक और समय पर की गई तैयारी जीवन की रक्षा करती है।
