
संपूर्ण कथा
गोकुल में बालक कृष्ण अपनी चंचल लीलाओं से सबका मन मोह लेते थे। वे माखन चुराते और ग्वाल-बालों में बाँटते थे। यशोदा मैया उन्हें डाँटतीं, पर उनकी मासूमियत देखकर क्रोध पिघल जाता था।
एक दिन बलराम और अन्य बालकों ने यशोदा से शिकायत की कि कन्हैया ने मिट्टी खाई है। यशोदा ने छड़ी लेकर डाँटते हुए उनसे मुँह खोलने को कहा। कृष्ण ने मुख खोला तो उसमें यशोदा को पूरा ब्रह्मांड दिखाई दिया, जिसमें पृथ्वी, आकाश, पर्वत और स्वयं गोकुल भी था।
यशोदा आश्चर्यचकित होकर कुछ समझ न सकीं। तभी भगवान की माया ने उन्हें यह स्मरण भुला दिया और वे पुनः कृष्ण को अपना पुत्र समझकर प्रेम से गोद में उठा लिया।
कथा का संदेश
ईश्वर सबसे सरल रूप में भी असीम होते हैं, और निश्छल प्रेम उनका सबसे प्रिय स्वरूप है।
