
संपूर्ण कथा
महाभारत युद्ध के सत्रहवें दिन कर्ण सेनापति बनकर अर्जुन के सामने आए। दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। कर्ण ने अर्जुन पर भयंकर बाण बरसाए और एक बाण श्री कृष्ण के चतुराई से रथ को नीचे दबाने से उनके मुकुट को ही लगा।
तभी कर्ण के रथ का पहिया पृथ्वी में धँस गया। कर्ण को अपने गुरु परशुराम के शाप के कारण महत्वपूर्ण क्षण में अस्त्र-विद्या भी स्मरण नहीं आई। वे पहिया निकालने लगे और अर्जुन से युद्ध के धर्म की याद दिलाते हुए रुकने को कहा।
श्री कृष्ण ने कर्ण को उनके अतीत के कर्म याद दिलाए, जैसे द्रौपदी का अपमान और अभिमन्यु का अन्यायपूर्ण वध। इसके बाद अर्जुन ने बाण चलाया और कर्ण वीरगति को प्राप्त हुए।
कथा का संदेश
जो स्वयं धर्म का पालन नहीं करता, उसे संकट के समय धर्म की दुहाई देने का अधिकार नहीं रहता।
