
संपूर्ण कथा
कंस ने श्री कृष्ण और बलराम को मारने की योजना बनाई। उसने अक्रूर को भेजकर उन्हें मथुरा के धनुष यज्ञ में बुलवाया। मथुरा पहुँचकर श्री कृष्ण ने कंस के विशाल धनुष को तोड़ डाला, जिससे कंस घबरा गया।
रंगभूमि में कंस ने मदमस्त हाथी कुवलयापीड़ को उन पर छोड़ा, पर श्री कृष्ण ने उसे मार दिया। इसके बाद कंस के श्रेष्ठ पहलवान चाणूर और मुष्टिक से मल्लयुद्ध हुआ, जिसमें बलराम और कृष्ण ने उन्हें पराजित कर दिया।
इसके बाद श्री कृष्ण ने मंच पर चढ़कर कंस को पकड़ा और उसका वध कर दिया। उन्होंने माता-पिता देवकी और वसुदेव को कारागार से मुक्त किया तथा कंस के पिता राजा उग्रसेन को पुनः राजा बनाया। उसके बाद दोनों भाइयों ने गुरु संदीपनि के आश्रम में विद्या ग्रहण की।
कथा का संदेश
अत्याचार चाहे कितना ही बड़ा हो, उसका अंत निश्चित है।
