Pauranik Katha

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: चंद्रदेव का उद्धार और महादेव का आशीष

प्रजापति दक्ष के क्षय रोग के शाप से मुक्ति पाने हेतु चंद्रदेव की कठोर तपस्या और सोमनाथ महादेव के प्राकट्य की पावन कथा।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: चंद्रदेव का उद्धार और महादेव का आशीष कथा

संपूर्ण कथा

पौराणिक काल में चंद्रदेव का विवाह प्रजापति दक्ष की सत्ताईस कन्याओं (सत्ताईस नक्षत्रों) से हुआ था। किंतु चंद्रदेव का समस्त अनुराग केवल रोहिणी के प्रति था, जिससे उनकी अन्य पत्नियां उपेक्षित और व्यथित रहने लगीं। अपनी पुत्रियों के कष्ट को देखकर प्रजापति दक्ष ने चंद्रदेव को समझाया, किंतु उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन न आया।

क्रोधवश दक्ष प्रजापति ने चंद्रदेव को क्षय रोग से ग्रस्त होने का भीषण शाप दे दिया। शाप के प्रभाव से चंद्रमा का तेज क्षीण होने लगा और ब्रह्मांड में अंधकार छाने लगा। वनस्पतियों और औषधियों की वृद्धि रुक गई, जिससे समस्त सृष्टि संकट में पड़ गई।

देवताओं के परामर्श पर चंद्रदेव ने गुजरात के पावन प्रभास क्षेत्र में जाकर छह मास तक भगवान आशुतोष की घोर तपस्या की और महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप किया। उनकी अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए।

शिवजी ने दक्ष के शाप की मर्यादा रखते हुए वरदान दिया कि प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष में चंद्रमा की कलाएं घटेंगी और शुक्ल पक्ष में पुनः बढ़कर पूर्णता को प्राप्त होंगी। चंद्रदेव के उद्धार के उपरांत महादेव भक्तों के कल्याण हेतु वहीं 'सोमनाथ' (चंद्रमा के नाथ) के रूप में सदा के लिए प्रतिष्ठित हो गए।

कथा का संदेश

सच्ची शरणागति और पश्चाताप से असाध्य कष्टों और प्रारब्ध के कठोर फलों से भी मुक्ति मिल सकती है।

सामान्य प्रश्न

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