Pauranik Katha

गजेंद्र मोक्ष

संकट में सब सहारे छूट जाने पर सच्चे हृदय से पुकारने वाले गजेंद्र को भगवान द्वारा बचाए जाने की कथा।

गजेंद्र मोक्ष कथा

संपूर्ण कथा

त्रिकूट पर्वत के वन में गजेंद्र नामक हाथियों का राजा अपने परिवार के साथ रहता था। एक दिन गर्मी से व्याकुल होकर वह सरोवर में जल पीने और स्नान करने उतरा। तभी एक शक्तिशाली ग्राह (मगरमच्छ) ने उसका पैर पकड़ लिया।

गजेंद्र ने अपनी पूरी शक्ति लगाई, उसके साथी हाथियों ने भी उसे खींचा, पर वह छूट न सका। यह संघर्ष बहुत लंबे समय तक चलता रहा। धीरे-धीरे गजेंद्र की शक्ति क्षीण होने लगी और ग्राह का बल बढ़ता गया। जब उसे समझ आ गया कि अब कोई सांसारिक सहारा काम नहीं आएगा, तब उसने पूर्ण समर्पण भाव से भगवान को पुकारा और एक कमल का पुष्प उन्हें अर्पित किया।

उसकी करुण पुकार सुनकर भगवान विष्णु तुरंत गरुड़ पर सवार होकर पहुँचे। उन्होंने सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध करके गजेंद्र को मुक्त किया। कथा के अनुसार वह ग्राह पूर्वजन्म में हूहू नामक गंधर्व था, जो शाप से इस योनि में आया था और भगवान के स्पर्श से उसे भी शाप से मुक्ति मिली।

कथा का संदेश

अहंकार छोड़कर सच्चे मन से की गई प्रार्थना ईश्वर तक अवश्य पहुँचती है।

सामान्य प्रश्न

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