Pauranik Katha

द्रौपदी स्वयंवर और अर्जुन का मत्स्य भेद

स्वयंवर में ब्राह्मण वेश में अर्जुन द्वारा मत्स्य भेद और द्रौपदी के पांडवों की पत्नी बनने की कथा।

द्रौपदी स्वयंवर और अर्जुन का मत्स्य भेद कथा

संपूर्ण कथा

पांचाल नरेश द्रुपद ने अपनी पुत्री द्रौपदी का स्वयंवर रखा। शर्त थी कि जो वीर ऊपर घूमते यंत्र के भीतर रखी मछली की आँख को नीचे जल में उसके प्रतिबिंब को देखकर तीर से भेदेगा, वही द्रौपदी का पति होगा। अनेक राजा प्रयास में असफल रहे।

लाक्षागृह की घटना के बाद पांडव ब्राह्मण वेश में छिपकर रह रहे थे। इस सभा में अर्जुन ने धनुष उठाया और प्रतिबिंब देखकर मछली की आँख में तीर मार दिया। श्री कृष्ण ने पांडवों को पहचान लिया था।

द्रौपदी को लेकर पांडव घर पहुँचे। बिना देखे माता कुंती ने कहा कि जो भी लाए हो, आपस में बाँट लो। माता की आज्ञा का मान रखने के लिए द्रौपदी का विवाह पाँचों पांडवों से हुआ। इसी विवाह ने पांडवों को पांचाल जैसे शक्तिशाली मित्र दिलाए।

कथा का संदेश

एकाग्रता और अभ्यास से कठिन से कठिन लक्ष्य भेदा जा सकता है।

सामान्य प्रश्न

यह कथा Sanatan Seva ऐप में सुनें, ऑडियो कथा के रूप में

संबंधित सामग्री

सभी कथाओं पर वापस जाएँ