Pauranik Katha

महर्षि दधीचि का अस्थि दान

देवताओं की रक्षा के लिए अपने शरीर का त्याग करने वाले महर्षि दधीचि की कथा।

महर्षि दधीचि का अस्थि दान कथा

संपूर्ण कथा

असुर वृत्रासुर को वरदान मिला था कि उसे किसी भी धातु या सूखे-गीले शस्त्र से नहीं मारा जा सकेगा। वह देवताओं को परास्त करके स्वर्ग से भगा देता है। परेशान होकर देवता भगवान विष्णु के पास पहुँचे।

भगवान ने उन्हें सलाह दी कि महर्षि दधीचि की हड्डियों से बना शस्त्र ही वृत्रासुर का वध कर सकता है। देवता दधीचि के पास पहुँचे और संकोच से अपनी बात रखी। महर्षि ने बिना किसी झिझक के योगबल से अपना शरीर त्याग दिया।

देवशिल्पी विश्वकर्मा ने उनकी अस्थियों से वज्र का निर्माण किया। इंद्र ने उसी वज्र से वृत्रासुर का वध किया और देवताओं को उनका स्वर्ग वापस मिला। दधीचि का नाम त्याग और परोपकार का सर्वोच्च उदाहरण बन गया।

कथा का संदेश

परोपकार के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करना सबसे बड़ा धर्म है।

सामान्य प्रश्न

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