Pauranik Katha

भीम और हनुमानजी का मिलन

अपने बल के अहंकार में चूर भीम को हनुमानजी द्वारा विनम्रता का पाठ पढ़ाने की कथा।

भीम और हनुमानजी का मिलन कथा

संपूर्ण कथा

वनवास में द्रौपदी को हवा से एक सुगंधित सौगंधिक पुष्प मिला और उन्होंने भीम से और पुष्प लाने की इच्छा जताई। भीम गदा लेकर गंधमादन पर्वत की ओर चल पड़े। मार्ग में एक वृद्ध वानर अपनी पूँछ पसारे हुए लेटा था और रास्ता रोक रहा था।

भीम ने उसे पूँछ हटाने को कहा, पर वानर ने कहा कि मैं वृद्ध हूँ, तुम स्वयं हटा दो। भीम ने पूरी शक्ति लगाई, पर पूँछ को हिला भी न सके। तब उन्हें समझ आया कि यह कोई साधारण वानर नहीं है और उन्होंने विनम्रता से परिचय पूछा।

वानर ने अपना रूप प्रकट किया और बताया कि वे पवनपुत्र हनुमान हैं, अर्थात भीम के बड़े भाई। उन्होंने भीम को गले लगाया और आशीर्वाद दिया कि महाभारत युद्ध में वे अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजमान रहेंगे।

कथा का संदेश

बल का अहंकार सदैव ऊँचे बल के सामने झुकता है, और विनम्रता ही सच्ची शक्ति है।

सामान्य प्रश्न

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