
संपूर्ण कथा
किष्किंधा के राजा बाली और उनके छोटे भाई सुग्रीव में मायावी राक्षस के कारण मतभेद हो गया। बाली ने सुग्रीव को राज्य से निकाल दिया और उसकी पत्नी रूमा को भी अपने पास रख लिया। सुग्रीव ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमान आदि मंत्रियों के साथ रहने लगे।
सीता की खोज में भटकते राम-लक्ष्मण से हनुमान ने मित्रता कराई। दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर मित्रता की। राम ने बाली का वध करने और सुग्रीव को राज्य दिलाने का वचन दिया, और सुग्रीव ने सीता की खोज में सहायता का वचन दिया।
सुग्रीव के ललकारने पर बाली और सुग्रीव का युद्ध हुआ। राम ने वृक्ष की ओट से बाण चलाकर बाली को घायल किया। मरते समय बाली ने इसके औचित्य पर प्रश्न किया, और राम ने धर्म और मित्र-वचन के आधार पर अपना पक्ष रखा। बाद में सुग्रीव राजा और अंगद युवराज बने।
कथा का संदेश
मित्र का वचन निभाना और धर्म के पक्ष में खड़ा होना कठिन होने पर भी आवश्यक है।
