
संपूर्ण कथा
कान्यकुब्ज (कन्नौज) का ब्राह्मण अजामिल पहले धर्मनिष्ठ था, पर बुरी संगत में पड़कर उसने अधर्म का जीवन अपना लिया। उसके अनेक पुत्र हुए, जिनमें सबसे छोटे का नाम उसने 'नारायण' रखा और उसे बहुत प्रेम करता था।
मृत्यु के समय जब यमदूत उसे लेने आए तो भयभीत अजामिल ने अपने पुत्र को पुकारा, 'नारायण!' उसी क्षण विष्णुदूत वहाँ प्रकट हुए और यमदूतों को रोक दिया।
विष्णुदूतों ने समझाया कि भगवान का नाम किसी भी भाव से लेने पर पाप का नाश करता है। यह सुनकर अजामिल को अपने जीवन का पश्चाताप हुआ। उसने गंगा तट पर जाकर भक्ति की और अंत में भगवान का धाम प्राप्त किया।
कथा का संदेश
भगवान का नाम पतित को भी पावन बना सकता है, और पश्चाताप का मार्ग सदैव खुला रहता है।
