
संपूर्ण कथा
महर्षि गौतम की पत्नी अहल्या अत्यंत सुंदर और तपस्विनी थीं। एक दिन इंद्र ने गौतम का रूप धारण करके छल किया। लौटकर आए गौतम ऋषि को सब ज्ञात हुआ तो उन्होंने इंद्र को शाप दिया और अहल्या को भी वर्षों तक अदृश्य रहकर तप करने का शाप दिया।
ऋषि ने कहा कि जब श्री राम इस आश्रम में आएँगे, तब उनके दर्शन से तुम्हारा उद्धार होगा। वाल्मीकि रामायण में वे अदृश्य होकर तपस्या करती हैं, जबकि परवर्ती परंपराओं में उन्हें शिला बना हुआ बताया गया है।
विश्वामित्र के साथ जाते हुए श्री राम और लक्ष्मण उस सूने आश्रम में पहुँचे। राम के दर्शन होते ही अहल्या पुनः प्रकट हुईं। राम और लक्ष्मण ने उनके चरण छुए और अहल्या अपने पति गौतम के पास लौट गईं।
कथा का संदेश
सच्चा पश्चाताप और धैर्य किसी भी शाप से मुक्ति का मार्ग खोल सकता है।
