
संपूर्ण कथा
कालकेय नामक असुर दिन में समुद्र में छिप जाते और रात में निकलकर ऋषियों को सताते थे। परेशान देवताओं ने महर्षि अगस्त्य से सहायता माँगी। महर्षि ने अपने तपोबल से पूरा समुद्र पी लिया, जिससे असुर दिखाई देने लगे और देवताओं ने उन्हें मार डाला।
बाद में समुद्र को पुनः भरने का प्रश्न उठा। कथा के अनुसार यह कार्य भगीरथ द्वारा गंगा को पृथ्वी पर लाने से पूर्ण हुआ।
एक अन्य प्रसंग में विंध्य पर्वत सूर्य का मार्ग रोकने के लिए बढ़ने लगा। अगस्त्य ने उससे झुकने को कहा और कहा कि जब तक मैं दक्षिण से लौट न आऊँ, तब तक ऐसे ही झुके रहना। वे कभी लौटकर नहीं आए और विंध्य आज तक झुका हुआ माना जाता है।
कथा का संदेश
गुरु के वचन का सम्मान करने वाला विनम्र रहकर ही बड़ा बनता है, और तप से असंभव कार्य संभव होते हैं।
