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Vrat Katha · भगवान शिव
प्रदोष व्रत कथा (त्रयोदशी संध्या पूजा)

परिचय
प्रदोष व्रत कथा (त्रयोदशी संध्या पूजा) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। भगवान शिव से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
प्रदोष व्रत कथा (त्रयोदशी संध्या पूजा)
Vrat Katha · भगवान शिव
【संकल्प ध्यान】
सत्यं शिवं सुन्दरं च निर्गुणं सगुणात्मकम्। प्रदोषकाले देवेशं पूजयेत् शूलपाणिनम्॥
【कथा सारांश】
प्राचीन काल में एक दरिद्र ब्राह्मणी अपने पुत्र के साथ भिक्षा मांगकर जीवन यापन करती थी। मार्ग में उसे विदर्भ देश का एक अनाथ राजकुमार मिला, जिसे शत्रुओं ने राज्य छीनकर निष्कासित कर दिया था। ब्राह्मणी ने उस राजकुमार को भी अपने पुत्र समान पाला।
शाण्डिल्य ऋषि के उपदेश से दोनों बालकों और ब्राह्मणी ने त्रयोदशी को प्रदोष काल में भगवान शिव का विधिपूर्वक व्रत प्रारंभ किया। व्रत के प्रभाव से राजकुमार को गंधर्व कन्या और सेना की सहायता प्राप्त हुई, जिससे उसने अपना पैतृक राज्य पुनः प्राप्त कर ब्राह्मणी के पुत्र को प्रधान मंत्री बनाया।
【फलश्रुति】
प्रदोष काल में शिव आराधना करने से समस्त ऋण, दरिद्रता, भय और रोगों का नाश होता है तथा मनुष्य शिव सायुज्य प्राप्त करता है।
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