- Home
- Bhajan & Aarti
- हरितालिका तीज व्रत कथा (पार्वती तपश्चर्या)
Vrat Katha · शिव-पार्वती
हरितालिका तीज व्रत कथा (पार्वती तपश्चर्या)

परिचय
हरितालिका तीज व्रत कथा (पार्वती तपश्चर्या) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। शिव-पार्वती से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
हरितालिका तीज व्रत कथा (पार्वती तपश्चर्या)
Vrat Katha · शिव-पार्वती
【संकल्प ध्यान】
उमामहेश्वराभ्यां नमो नमः। सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
【कथा सारांश】
भगवान शिव ने माता पार्वती को उनके पूर्वजन्म का स्मरण कराते हुए कहा— हे पार्वती! तुमने मुझे पति रूप में पाने के लिए हिमालय पर्वत पर गंगा तट पर अत्यंत कठिन तप किया था। तुमने अन्न-जल त्यागकर सूखे पत्ते खाए और घोर शीत, ग्रीष्म व वर्षा को सहन किया।
तुम्हारी सखियां तुम्हें पिता के अनिच्छुक विवाह प्रस्ताव से बचाकर घने वन में ले गईं (हरितालिका अर्थात सखियों द्वारा हरण)। भाद्रपद शुक्ल तृतीया को तुमने हस्त नक्षत्र में बालू से शिवलिंग बनाकर रात्रि जागरण करते हुए मेरी आराधना की, जिससे प्रसन्न होकर मैंने तुम्हें वरदान दिया।
【फलश्रुति】
हरितालिका तीज का व्रत करने वाली कुंआरी कन्याओं को मनोनुकूल वर तथा सुहागिन स्त्रियों को अखंड सौभाग्य एवं पारिवारिक शांति प्राप्त होती है।
Sanatan Seva ऐप में हरितालिका तीज व्रत कथा (पार्वती तपश्चर्या) की ऑडियो, सुनें और अपने परिवार के साथ गाएँ।
