- Home
- Bhajan & Aarti
- करवा चौथ व्रत कथा (अखंड सौभाग्य एवं चंद्र दर्शन)
Vrat Katha · चौथ माता
करवा चौथ व्रत कथा (अखंड सौभाग्य एवं चंद्र दर्शन)

परिचय
करवा चौथ व्रत कथा (अखंड सौभाग्य एवं चंद्र दर्शन) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। चौथ माता से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
करवा चौथ व्रत कथा (अखंड सौभाग्य एवं चंद्र दर्शन)
Vrat Katha · चौथ माता
【संकल्प ध्यान】
नमस्तस्यै शिवायै शर्वाण्यै वरदायिन्यै। सौभाग्यं सन्ततिं देहि सर्वकार्यप्रसाधनी॥
【कथा सारांश】
एक साहूकार के सात पुत्र और एक गुणवती कन्या वीरावती थी। करवा चौथ के दिन वीरावती ने निर्जला व्रत रखा। भूख-प्यास से व्याकुल बहन को देखकर भाइयों ने दूर पीपल के पेड़ के पीछे दीपक जलाकर छलनी से कृत्रिम चंद्रमा दिखाकर उसका व्रत खुलवा दिया।
नियम भंग होते ही उसके पति का स्वास्थ्य संकट में पड़ गया। तब वीरावती ने पूर्ण भक्ति से पुनः करवा चौथ का नियमपूर्वक व्रत किया, माता चौथ और शिव-पार्वती की आराधना की। उसकी अटूट निष्ठा और तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उसके पति को पुनः पूर्ण जीवनदान और आरोग्य प्रदान किया।
【फलश्रुति】
जो सुहागिन स्त्रियां विधि-विधान से करवा चौथ का निर्जल व्रत रखकर चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देती हैं, उनके पति दीर्घायु होते हैं और घर में अखंड सौभाग्य का वास होता है।
Sanatan Seva ऐप में करवा चौथ व्रत कथा (अखंड सौभाग्य एवं चंद्र दर्शन) की ऑडियो, सुनें और अपने परिवार के साथ गाएँ।
