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Vrat Katha · सूर्य देव
रविवार व्रत कथा (सूर्यदेव आरोग्य एवं तेज)

परिचय
रविवार व्रत कथा (सूर्यदेव आरोग्य एवं तेज) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। सूर्य देव से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
रविवार व्रत कथा (सूर्यदेव आरोग्य एवं तेज)
Vrat Katha · सूर्य देव
【संकल्प ध्यान】
आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। जन्मान्तरसहस्रेषु दारिद्र्यं नोपजायते॥
【कथा सारांश】
एक वृद्धा ब्राह्मणी प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर स्नान कर घर को गोबर से लीपकर पवित्र करती और भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर रविवार का व्रत रखती थी। सूर्यदेव की कृपा से उसके घर में किसी प्रकार का कष्ट न था। उसकी पड़ोसन ईर्ष्यावश अपनी गाय को घर के भीतर बांधने लगी ताकि वृद्धा को गोबर न मिल सके।
वृद्धा ने बिना भोजन बनाए भूखे रहकर पूरा दिन सूर्यदेव का स्मरण किया। रात्रि में भगवान सूर्य ने स्वप्न में आकर दर्शन दिए और उसके आंगन में एक कामधेनु समान अलौकिक गाय प्रकट कर दी। ईर्ष्यालु पड़ोसन के सारे षड्यंत्र निष्फल हुए और राजा ने वृद्धा के भक्ति-भाव का सम्मान किया।
【फलश्रुति】
रविवार का व्रत रखने से नेत्र-ज्योति बढ़ती है, असाध्य रोग शांत होते हैं, मान-सम्मान एवं तेज में वृद्धि होती है तथा घर में स्थाई सुख-समृद्धि का वास होता है।
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