Vrat Katha · शनि देव

शनिवार व्रत कथा (कर्मफलदाता शनिदेव)

शनिवार व्रत कथा (कर्मफलदाता शनिदेव)

परिचय

शनिवार व्रत कथा (कर्मफलदाता शनिदेव) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। शनि देव से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।

ॐ

शनिवार व्रत कथा (कर्मफलदाता शनिदेव)

Vrat Katha · शनि देव

【संकल्प ध्यान】

नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

【कथा सारांश】

एक बार नवग्रहों में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। सभी ग्रह न्याय के लिए देवराज इंद्र के पास पहुंचे, किंतु इंद्र ने असमर्थता जताते हुए उन्हें न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य के पास भेज दिया। राजा विक्रमादित्य ने नौ धातुओं के सिंहासन बनवाए और सबसे पीछे लोहे का सिंहासन रखवाया, जिस पर शनिदेव बैठे।

शनिदेव ने इसे अपमान मानकर राजा को साढ़े साती के प्रकोप का अनुभव कराया। राजा को राज्य गंवाना पड़ा और तेल पेरने वाले कोल्हू तक में काम करना पड़ा। जब विक्रमादित्य ने कठिन विपत्ति में भी धैर्य रखकर शनिवार को शनिदेव की स्तुति की, तब शनिदेव प्रसन्न हुए और उनका खोया हुआ राज्य व वैभव पहले से अधिक लौटा दिया।

【फलश्रुति】

शनिवार के दिन व्रत रखने, पीपल वृक्ष में जल चढ़ाने, तिल-तेल का दान करने तथा कथा श्रवण से साढ़े साती व ढैय्या का शमन होता है तथा सर्वत्र विजय मिलती है।

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