Vrat Katha · माँ संतोषी और वैभव लक्ष्मी

शुक्रवार व्रत कथा (संतोषी माता एवं वैभव लक्ष्मी)

शुक्रवार व्रत कथा (संतोषी माता एवं वैभव लक्ष्मी)

परिचय

शुक्रवार व्रत कथा (संतोषी माता एवं वैभव लक्ष्मी) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। माँ संतोषी और वैभव लक्ष्मी से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।

ॐ

शुक्रवार व्रत कथा (संतोषी माता एवं वैभव लक्ष्मी)

Vrat Katha · माँ संतोषी और वैभव लक्ष्मी

【संकल्प ध्यान】

हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्। सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥

【कथा सारांश】

एक बुढ़िया के सात पुत्र थे, जिनमें सबसे छोटा पुत्र भोला था। बहुओं के ताने और भेदभाव से दुःखी होकर छोटा पुत्र परदेस चला गया। पीछे से उसकी पतिव्रता पत्नी पर ससुराल वालों ने बड़े अत्याचार किए, उसे जंगल से लकड़ियां लानी पड़ती थीं और सूखी रोटियां दी जाती थीं।

एक दिन उसने स्त्रियों को संतोषी माता का शुक्रवार व्रत करते देखा। उसने विधि पूछकर गुड़-चने से व्रत किया और खटाई का पूर्ण त्याग किया। माता की कृपा से उसके पति का व्यापार चमका, वह अपार धन लेकर लौटा और दोनों ने सानंद उद्यान बनाकर माता का भव्य उद्यापन किया।

【फलश्रुति】

शुक्रवार का व्रत रखने से दांपत्य जीवन में मधुरता, सौभाग्य, धन-संपत्ति तथा मानसिक शांति की प्राप्ति होती है और समस्त संताप मिट जाते हैं।

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