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Vrat Katha · बृहस्पति और भगवान विष्णु
गुरुवार व्रत कथा (बृहस्पति देव एवं श्री हरि)

परिचय
गुरुवार व्रत कथा (बृहस्पति देव एवं श्री हरि) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। बृहस्पति और भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
गुरुवार व्रत कथा (बृहस्पति देव एवं श्री हरि)
Vrat Katha · बृहस्पति और भगवान विष्णु
【संकल्प ध्यान】
देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥
【कथा सारांश】
एक प्रतापी राजा के महल में एक भिक्षुक आया, किंतु रानी ने दान देने में आलस्य और अनिच्छा दिखाई। जब बृहस्पति देव साधु वेश में पुनः आए तो रानी ने ऐसा उपाय पूछा जिससे सारा धन समाप्त हो जाए ताकि दान न देना पड़े। साधु ने उसे बृहस्पतिवार को वर्जित कर्म करने को कहा।
रानी द्वारा गुरुवार को निषिद्ध कर्म करने से राज्य का सारा वैभव नष्ट हो गया और राजा-रानी दाने-दाने को मोहताज हो गए। तब रानी को अपनी भूल का पश्चाताप हुआ। उसने पीले पुष्प, चने की दाल व गुड़ से बृहस्पति देव का पूजन कर व्रत प्रारंभ किया, जिससे खोया हुआ वैभव पुनः लौट आया।
【फलश्रुति】
बृहस्पतिवार का व्रत रखने से विद्या, ज्ञान, धन-धान्य और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है तथा कन्याओं के विवाह में आ रही समस्त बाधाएं दूर होती हैं।
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