- Home
- Bhajan & Aarti
- बुधवार व्रत कथा (बुध ग्रह एवं गणेश जी)
Vrat Katha · बुध और गणेश देव
बुधवार व्रत कथा (बुध ग्रह एवं गणेश जी)

परिचय
बुधवार व्रत कथा (बुध ग्रह एवं गणेश जी) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। बुध और गणेश देव से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
बुधवार व्रत कथा (बुध ग्रह एवं गणेश जी)
Vrat Katha · बुध और गणेश देव
【संकल्प ध्यान】
प्रियंगु कलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्। सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥
【कथा सारांश】
एक साहूकार अपनी पत्नी को विदा कराने ससुराल गया। बुधवार के दिन उसने सास-ससुर से विदाई की हठ की, यद्यपि सबने समझाया कि बुधवार को कन्या की विदाई यात्रा शुभ नहीं मानी जाती। मार्ग में साहूकार जैसा ही रूप धारण किए एक अन्य व्यक्ति रथ में आकर बैठ गया, जिससे भ्रम और कलह उत्पन्न हो गया।
जब राजा के दूतों ने न्याय करना चाहा तो साहूकार असहाय हो गया। उसने मन ही मन बुद्ध देव और भगवान गणेश का स्मरण कर अपनी भूल स्वीकार की और बुधवार व्रत का संकल्प लिया। तत्क्षण वह दूसरा व्यक्ति अंतर्धान हो गया और साहूकार सानंद घर पहुँचा।
【फलश्रुति】
बुधवार का व्रत रखने और हरे रंग के वस्त्र व मूंग की दाल का दान करने से व्यापार, बुद्धि और वाणी में असाधारण उन्नति होती है तथा पारिवारिक जीवन सुखमय बनता है।
Sanatan Seva ऐप में बुधवार व्रत कथा (बुध ग्रह एवं गणेश जी) की ऑडियो, सुनें और अपने परिवार के साथ गाएँ।
