Sundarkand · श्री हनुमान जी

सुन्दरकाण्ड: लङ्का दहन एवं अक्षय संहार

सुन्दरकाण्ड: लङ्का दहन एवं अक्षय संहार

परिचय

सुन्दरकाण्ड: लङ्का दहन एवं अक्षय संहार — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। रामचरितमानस सुन्दरकाण्ड का प्रसंग।

ॐ

सुन्दरकाण्ड: लङ्का दहन एवं अक्षय संहार

Sundarkand · श्री हनुमान जी

【चौपाई】

पुनि पठयउ तेहिं अच्छकुमारा। चला संग लै सुभट अपारा॥

अति बिसाल तरु एक उपारा। बिरथ कीन्ह लंकेस कुमारा॥

【दोहा】

कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद। सुत बध सुरति कीन्हि पुनि उपजा हृदयँ बिषाद॥20॥

【चौपाई】

पावक जरत देखि हनुमंता। भयउ परम लघु रुप तुरंता॥

【दोहा】

निसिचर निकर पतंग सम रघुपति बान कृसानु। जननी हृदयँ धीर धरु जरे निसाचर जानु॥15॥

【चौपाई】

दूतन्हि सन सुनि पुरजन बानी। मंदोदरी अधिक अकुलानी॥

मंदोदरी हृदयँ कर चिंता। भयउ कंत पर बिधि बिपरीता॥

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