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Sundarkand · सीता-हनुमान
सुन्दरकाण्ड: अशोक वाटिका एवं सीता दर्शन

परिचय
सुन्दरकाण्ड: अशोक वाटिका एवं सीता दर्शन — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। रामचरितमानस सुन्दरकाण्ड का प्रसंग।
सुन्दरकाण्ड: अशोक वाटिका एवं सीता दर्शन
Sundarkand · सीता-हनुमान
【चौपाई】
करि सोइ रूप गयउ पुनि तहवाँ। बन असोक सीता रह जहवाँ॥
【दोहा】
निज पद नयन दिएँ मन राम पद कमल लीन। परम दुखी भा पवनसुत देखि जानकी दीन॥8॥
【चौपाई】
सुनहि बिनय मम बिटप असोका। सत्य नाम करु हरु मम सोका॥
【दोहा】
कपि करि हृदयँ बिचार दीन्हि मुद्रिका डारी तब। जनु असोक अंगार दीन्हि हरषि उठि कर गहेउ॥12॥
【चौपाई】
तब देखी मुद्रिका मनोहर। राम नाम अंकित अति सुंदर॥
यह मुद्रिका मातु मैं आनी। दीन्हि राम तुम्ह कहँ सहिदानी॥
राम दूत मैं मातु जानकी। सत्य सपथ करुनानिधान की॥
【दोहा】
रघुपति कर संदेसु अब सुनु जननी धरि धीर। अस कहि कपि गद गद भयउ भरे बिलोचन नीर॥14॥
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