Sundarkand · श्री हनुमान जी

सुन्दरकाण्ड: समुद्र लङ्घन एवं सुरसा प्रसंग

सुन्दरकाण्ड: समुद्र लङ्घन एवं सुरसा प्रसंग

परिचय

सुन्दरकाण्ड: समुद्र लङ्घन एवं सुरसा प्रसंग — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। रामचरितमानस सुन्दरकाण्ड का प्रसंग।

ॐ

सुन्दरकाण्ड: समुद्र लङ्घन एवं सुरसा प्रसंग

Sundarkand · श्री हनुमान जी

【चौपाई】

जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥

तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई। सहि दुख कंद मूल फल खाई॥

जब लगि आवौं सीतहि देखी। होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी॥

【दोहा】

राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान। आसिष देह गई सो हरषि चलेउ हनुमान॥2॥

【चौपाई】

जलनिधि रघुपति दूत बिचारी। तैं मैनाक होहि श्रमहारी॥

सुरसा नाम अहिन्ह कै माता। पठइन्हि आइ कही तेहिं बाता॥

आजु सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा। सुनत बचन कह पवनकुमारा॥

जस जस सुरसा बदनु बढ़ावा। तासु दून कपि रूप देखावा॥

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