- Home
- Bhajan & Aarti
- गोवर्धन पूजा एवं भाई दूज पौराणिक कथा
Katha · कृष्ण-यमुना
गोवर्धन पूजा एवं भाई दूज पौराणिक कथा

परिचय
गोवर्धन पूजा एवं भाई दूज पौराणिक कथा — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। कृष्ण-यमुना से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
गोवर्धन पूजा एवं भाई दूज पौराणिक कथा
Katha · कृष्ण-यमुना
【संकल्प ध्यान】
गोवर्धनधराधार गोकुलत्राणकारक। विष्णुबाहुकृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रदो भव॥
【कथा सारांश】
भगवान श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के अहंकार युक्त यज्ञ के स्थान पर प्रत्यक्ष प्रकृति, गायों और गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की प्रेरणा दी। जब कुपित होकर इंद्र ने मूसलाधार वर्षा की, तब भगवान ने कनिष्ठिका अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर पूरे ब्रज की सात दिन तक रक्षा की।
कार्तिक शुक्ल द्वितीया (भाई दूज/यम द्वितीया) को यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने आए। यमुना के प्रेमपूर्ण आतिथ्य से तृप्त होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के हाथ का भोजन कर तिलक लगवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।
【फलश्रुति】
अन्नकूट भोग अर्पण और यम द्वितीया पूजन से कुल में शांति, दीर्घायु, परस्पर स्नेह तथा प्राकृतिक आपदाओं से पूर्ण सुरक्षा प्राप्त होती है।
Sanatan Seva ऐप में गोवर्धन पूजा एवं भाई दूज पौराणिक कथा की ऑडियो, सुनें और अपने परिवार के साथ गाएँ।
