Vrat Katha · माँ गंगा और भगवान शिव

गंगा दशहरा व्रत कथा (दशविध पाप निवारण)

गंगा दशहरा व्रत कथा (दशविध पाप निवारण)

परिचय

गंगा दशहरा व्रत कथा (दशविध पाप निवारण) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। माँ गंगा और भगवान शिव से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।

ॐ

गंगा दशहरा व्रत कथा (दशविध पाप निवारण)

Vrat Katha · माँ गंगा और भगवान शिव

【संकल्प ध्यान】

नमो भगवत्यै दशपापहरायै गंगायै नारायण्यै रेवत्यै शिवायै दक्षायै अमृतायै विश्वरूपिण्यै नन्दिनायै ते नमो नमः।

【कथा सारांश】

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है। इक्ष्वाकु वंश के चक्रवर्ती राजा सगर के साठ हजार पुत्र कपिल मुनि के कोप से भस्म हो गए थे। उनकी मुक्ति और उद्धार के लिए उनके वंशजों ने कठोर तपस्या की, किंतु सफलता न मिली। अंततः सगर के प्रपौत्र राजा भगीरथ ने हिमालय के गोकर्ण तीर्थ में घोर तपस्या की।

भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर माता गंगा ने पृथ्वी पर उतरना स्वीकार किया, किंतु उनके प्रचंड वेग को रोकने का सामर्थ्य केवल देवाधिदेव महादेव में था। भगीरथ की पुनः प्रार्थना पर भगवान शिव ने अपनी जटाएं खोलकर गंगा के वेग को बांधा और एक शांत धारा बनाकर पृथ्वी पर प्रवाहित किया। भगीरथ गंगा जी को अपने पीछे-पीछे कपिल मुनि के आश्रम तक ले गए, जहाँ उनके स्पर्श मात्र से सगर के साठ हजार पुत्र तर गए।

【फलश्रुति】

गंगा दशहरा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने, दस दीपकों और दस प्रकार के फलों का दान करने से तीन कायिक, चार वाचिक तथा तीन मानसिक—कुल दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं।

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