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Vrat Katha · सूर्य देव और छठी मैया
छठ पूजा व्रत कथा (सूर्य षष्ठी महापर्व)

परिचय
छठ पूजा व्रत कथा (सूर्य षष्ठी महापर्व) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। सूर्य देव और छठी मैया से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
छठ पूजा व्रत कथा (सूर्य षष्ठी महापर्व)
Vrat Katha · सूर्य देव और छठी मैया
【संकल्प ध्यान】
ॐ सूर्यदेव महाभाग त्रैलोक्यतिमिरपह। षष्ठी देव्यै च देवाय नमः सायं प्रभातिकम्॥
【कथा सारांश】
राजा प्रियंवद और उनकी रानी मालिनी को कोई संतान नहीं थी। महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराकर रानी को आहुति की खीर दी, जिससे पुत्र तो उत्पन्न हुआ किंतु वह मृत पैदा हुआ। राजा जब श्मशान में अपने प्राण त्यागने लगे, तब ब्रह्मा जी की मानस पुत्री षष्ठी देवी (छठी मैया) प्रकट हुईं।
देवी ने कहा— मैं प्रकृति की छठी अंश हूँ और बालकों की रक्षिका हूँ। देवी ने बालक को स्पर्श कर पुनर्जीवित कर दिया। राजा ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को संपूर्ण प्रजा सहित सूर्यदेव और छठी मैया का चार दिवसीय कठिन निर्जला व्रत किया, जिससे उनका वंश अमर हो गया।
【फलश्रुति】
छठ पर्व में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने से आरोग्य, तेज, संतान की दीर्घायु तथा समस्त पारिवारिक कष्टों का निवारण होता है।
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