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Ekadashi · भगवान विष्णु
जया एकादशी माहात्म्य (पिशाच योनि से मुक्ति)

परिचय
जया एकादशी माहात्म्य (पिशाच योनि से मुक्ति) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
जया एकादशी माहात्म्य (पिशाच योनि से मुक्ति)
Ekadashi · भगवान विष्णु
【संकल्प ध्यान】
जया सर्वप्रदा देवी पिशाचत्वविनाशिनी। माघमासस्य शुक्ले तु पूजयेत् पुरुषोत्तमम्॥
【कथा सारांश】
माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं। इंद्र की सभा में गंधर्व माल्यवान और अप्सरा पुष्यवती गायन-नृत्य कर रहे थे। एक-दूसरे पर मोहित होकर वे सभा की मर्यादा भूल गए और सुर-ताल से भटक गए। देवराज इंद्र ने रुष्ट होकर दोनों को पिशाच योनि में जन्म लेकर हिमालय की बर्फीली चोटियों पर भटकने का शाप दे दिया।
पिशाच रूप में दोनों अत्यंत शीत और भूख-प्यास से तड़प रहे थे। संयोगवश माघ शुक्ल एकादशी के दिन असह्य ठंड के कारण वे केवल फलाहार भी न कर सके और दिन-रात निराहार रहकर जागते रहे। अनजाने में हुए इस जया एकादशी व्रत के पुण्य प्रभाव से दोनों का पिशाचत्व नष्ट हो गया और वे पुनः दिव्य गंधर्व शरीर प्राप्त कर स्वर्ग लौट आए।
【फलश्रुति】
जया एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य को कभी भूत, प्रेत या पिशाच योनि में नहीं जाना पड़ता और वह जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्त हो जाता है।
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