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Ekadashi · भगवान विष्णु
षट्तिला एकादशी माहात्म्य (तिल का षड्विध प्रयोग)

परिचय
षट्तिला एकादशी माहात्म्य (तिल का षड्विध प्रयोग) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
षट्तिला एकादशी माहात्म्य (तिल का षड्विध प्रयोग)
Ekadashi · भगवान विष्णु
【संकल्प ध्यान】
तिलस्नायी तिलोद्वर्ती तिलहोमी तिलप्रदः। तिलभुक् तिलवापी च षट्तिला पापनाशिनी॥
【कथा सारांश】
माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षट्तिला एकादशी कहते हैं। एक वृद्धा ब्राह्मणी ने जीवन भर कठिन व्रत और तपस्या की, किंतु कभी किसी को अन्न या भोजन का दान नहीं दिया। भगवान विष्णु स्वयं भिक्षुक बनकर उसके द्वार पर गए, तो उसने भिक्षा में मिट्टी का एक ढेला उसके पात्र में डाल दिया।
तप के प्रभाव से मृत्यु के बाद उसे स्वर्ग में एक सुंदर महल मिला, किंतु वह अन्न और जल से सर्वथा रिक्त था। श्रीहरि के निर्देश पर उसने देव-स्त्रियों से षट्तिला एकादशी के व्रत और तिल-दान की विधि सीखी। उसने श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर तिलों का दान किया, जिससे उसका महल धन-धान्य, अमृत और दिव्य संपदा से परिपूर्ण हो गया।
【फलश्रुति】
षट्तिला एकादशी पर तिलों का छह प्रकार से उपयोग और दान करने से मनुष्य जन्म-मरण के कष्टों और दरिद्रता से मुक्त होकर स्वर्गिक आनंद प्राप्त करता है।
Sanatan Seva ऐप में षट्तिला एकादशी माहात्म्य (तिल का षड्विध प्रयोग) की ऑडियो, सुनें और अपने परिवार के साथ गाएँ।
