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Ekadashi · माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु
रमा एकादशी माहात्म्य (लक्ष्मी कृपा एवं ऐश्वर्य प्राप्ति)

परिचय
रमा एकादशी माहात्म्य (लक्ष्मी कृपा एवं ऐश्वर्य प्राप्ति) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
रमा एकादशी माहात्म्य (लक्ष्मी कृपा एवं ऐश्वर्य प्राप्ति)
Ekadashi · माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु
【संकल्प ध्यान】
रमा एकादशी पुण्या सर्वैश्वर्यप्रदायिनी। दामोदरं जगन्नाथं पूजयेत् विधिवन्नरः॥
【कथा सारांश】
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है (रमा अर्थात माता लक्ष्मी)। मुचुकुंद नामक धर्मात्मा राजा की कन्या चंद्रभागा का विवाह राजा चंद्रसेन के पुत्र शोभन से हुआ। शोभन शारीरिक रूप से दुर्बल था और भूख सहन करने में सर्वथा असमर्थ था, किंतु मुचुकुंद के राज्य में एकादशी के दिन पशुओं को भी अन्न खाने की अनुमति न थी।
शोभन ने कार्तिक कृष्ण एकादशी का निर्जल व्रत रखा, किंतु भूख-प्यास से व्याकुल होकर प्रातः होते ही उसने प्राण त्याग दिए। चंद्रभागा सती न होकर प्रभु स्मरण में लीन रही। व्रत के प्रभाव से शोभन को मंदराचल पर्वत पर अलौकिक देवपुरी का राज्य प्राप्त हुआ। जब चंद्रभागा ने अपने जीवन भर के एकादशी व्रतों का पुण्य उसे अर्पित किया, तो वह देवपुरी सदा के लिए स्थिर और अमर हो गई।
【फलश्रुति】
रमा एकादशी का व्रत करने से माता लक्ष्मी और भगवान दामोदर की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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