Ekadashi · भगवान विष्णु

इन्दिरा एकादशी माहात्म्य (पितृ तर्पण एवं पितृ मोक्ष)

इन्दिरा एकादशी माहात्म्य (पितृ तर्पण एवं पितृ मोक्ष)

परिचय

इन्दिरा एकादशी माहात्म्य (पितृ तर्पण एवं पितृ मोक्ष) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।

ॐ

इन्दिरा एकादशी माहात्म्य (पितृ तर्पण एवं पितृ मोक्ष)

Ekadashi · भगवान विष्णु

【संकल्प ध्यान】

इन्दिरा पितृतृप्तिदा सर्वपापविनाशिनी। अश्विनकृष्णपक्षे तु पूजयेत् जनार्दनम्॥

【कथा सारांश】

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष (पितृ पक्ष) की एकादशी को इन्दिरा एकादशी कहते हैं। महिष्मती नगरी के धर्मात्मा राजा इंद्रसेन के सामने एक दिन देवर्षि नारद उपस्थित हुए और बोले— हे राजन! यमलोक में मैंने आपके पिता को उनके किसी पूर्वजन्म के व्रत-भंग दोष के कारण यमराज की सभा में कष्ट भोगते देखा है।

नारद जी ने राजा को पितृ पक्ष की इन्दिरा एकादशी का व्रत कर उसका पुण्य अपने पिता को अर्पित करने की विधि समझाई। राजा इंद्रसेन ने ब्राह्मणों सहित विधिपूर्वक शालिग्राम जी का पूजन कर यह व्रत किया। संकल्प छोड़ते ही आकाश से पुष्प वृष्टि हुई और उनके पिता गरुड़ पर आरूढ़ होकर सीधे वैकुंठ धाम को प्रस्थान कर गए।

【फलश्रुति】

इन्दिरा एकादशी का व्रत करने और पितरों के निमित्त तर्पण करने से अधोगति में पड़े पितर मुक्त हो जाते हैं और व्रतकर्ता को अखंड ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

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