Ekadashi · भगवान विष्णु

अजा एकादशी माहात्म्य (सत्यवादी हरिश्चंद्र उद्धार)

अजा एकादशी माहात्म्य (सत्यवादी हरिश्चंद्र उद्धार)

परिचय

अजा एकादशी माहात्म्य (सत्यवादी हरिश्चंद्र उद्धार) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।

ॐ

अजा एकादशी माहात्म्य (सत्यवादी हरिश्चंद्र उद्धार)

Ekadashi · भगवान विष्णु

【संकल्प ध्यान】

अजा पापहरा पुण्या सर्वदुःखविनाशिनी। ऋषीकेशं प्रपन्नोऽहं त्राहि मां भवसागरात्॥

【कथा सारांश】

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहते हैं। सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने सत्य की रक्षा हेतु अपना सारा राज्य दान कर दिया और स्वयं को, पत्नी तारावती तथा पुत्र रोहित को बेच दिया। वे काशी में श्मशान घाट पर चांडाल के सेवक के रूप में कफ़न कर वसूलने का कार्य करने लगे।

अत्यंत दुःख की घड़ी में गौतम ऋषि ने राजा को भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अजा) का व्रत और रात्रि जागरण करने का उपदेश दिया। राजा ने पूर्ण श्रद्धा से व्रत किया। व्रत के प्रभाव से सर्पदंश से मृत उनका पुत्र पुनः जीवित हो गया, बिछुड़ा हुआ परिवार मिल गया और उनका खोया हुआ राज्य पहले से भी अधिक वैभव के साथ वापस लौट आया।

【फलश्रुति】

अजा एकादशी का व्रत करने से पूर्वजन्म के संचित पाप नष्ट हो जाते हैं और साधक समस्त दुःखों को पार कर अंत में विष्णु धाम को प्राप्त होता है।

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