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Ekadashi · भगवान विष्णु
कामिका एकादशी माहात्म्य (तुलसी दल अर्चन)

परिचय
कामिका एकादशी माहात्म्य (तुलसी दल अर्चन) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
कामिका एकादशी माहात्म्य (तुलसी दल अर्चन)
Ekadashi · भगवान विष्णु
【संकल्प ध्यान】
कामिका सर्वपापघ्नी पापिनां पापनाशिनी। श्रावणे कृष्णपक्षे तु पूजयेत् चक्रधारिणम्॥
【कथा सारांश】
श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। एक गाँव में एक क्रोधी क्षत्रिय जमींदार का एक ब्राह्मण से विवाद हो गया और हाथापाई में अनजाने में ब्राह्मण की मृत्यु हो गई। पश्चाताप से दग्ध क्षत्रिय ने जब मृतक का दाह-संस्कार करना चाहा, तो पंडितों ने ब्रह्महत्या के पाप के कारण संस्कार में भाग लेने से मना कर दिया।
व्यथित होकर उसने एक सिद्ध मुनि से प्रायश्चित का मार्ग पूछा। मुनि ने उसे श्रावण कृष्ण एकादशी (कामिका) को भगवान श्रीधर की पूजा, उपवास और रात्रि जागरण करने का विधान बताया। क्षत्रिय ने पूरी श्रद्धा से यह व्रत किया। रात्रि में भगवान विष्णु ने स्वप्न में प्रकट होकर उसे ब्रह्महत्या के दोष से मुक्त किया और उसका कल्याण हुआ।
【फलश्रुति】
कामिका एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि को तुलसी दल अर्पित करने से गंगा स्नान और अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है तथा पितरों को तृप्ति प्राप्त होती है।
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