Ekadashi · भगवान विष्णु

आमलकी एकादशी माहात्म्य (आंवला वृक्ष पूजन)

आमलकी एकादशी माहात्म्य (आंवला वृक्ष पूजन)

परिचय

आमलकी एकादशी माहात्म्य (आंवला वृक्ष पूजन) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।

ॐ

आमलकी एकादशी माहात्म्य (आंवला वृक्ष पूजन)

Ekadashi · भगवान विष्णु

【संकल्प ध्यान】

धात्री देवि नमस्तुभ्यं सर्वपापप्रणाशिनि। अमृतोद्भव संभूते मोक्षदात्री प्रसीद मे॥

【कथा सारांश】

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है। भगवान विष्णु के मुख से अमृत बूंद गिरने से आंवले (आमलकी) वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी। वैदिक काल में राजा चैत्ररथ संपूर्ण प्रजा के साथ मंदिर परिसर में आंवला वृक्ष के नीचे रात्रि जागरण कर भगवान श्रीहरि का पूजन कर रहे थे।

तभी एक भूखा-प्यासा व्याध वहाँ आया और भोजन की लालसा में छिपकर रात भर जागरण व भजन सुनता रहा। अनजाने में किए गए इस एकादशी व्रत और जागरण के प्रभाव से अगले जन्म में वह धर्मात्मा राजा वसूरथ बना और जब डाकुओं ने उसे घेरकर प्रहार किया, तो उसके शरीर से प्रकट हुई भगवती शक्ति ने डाकुओं का संहार कर उसकी रक्षा की।

【फलश्रुति】

आमलकी एकादशी का व्रत और आंवला वृक्ष का सिंचन व पूजन करने से समस्त यज्ञों के अनुष्ठान के समान अक्षय फल मिलता है और जीवन में आरोग्य व ऐश्वर्य की वृद्धि होती है।

धुन के साथ सुनें

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