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Ekadashi · भगवान विष्णु
योगिनी एकादशी माहात्म्य (रोग एवं शाप विमुक्ति)

परिचय
योगिनी एकादशी माहात्म्य (रोग एवं शाप विमुक्ति) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
योगिनी एकादशी माहात्म्य (रोग एवं शाप विमुक्ति)
Ekadashi · भगवान विष्णु
【संकल्प ध्यान】
योगिनी सर्वपापघ्नी कुष्ठरोगविनाशिनी। नारायणं जगन्नाथं स्मृत्वा पापैः प्रमुच्यते॥
【कथा सारांश】
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं। अलकापुरी के राजा कुबेर शिवजी के अनन्य भक्त थे और हेम नामक माली प्रतिदिन उनके लिए मानसरोवर से पुष्प लाता था। एक दिन हेम अपनी सुन्दरी पत्नी विशालाक्षी के प्रेम में ऐसा मग्न हुआ कि समय पर पुष्प लेकर नहीं पहुँचा।
पूजा में विघ्न पड़ने से कुबेर ने क्रोधित होकर उसे श्वेत कुष्ठ का रोगी होकर मृत्युलोक में भटकने का शाप दे दिया। अनेक कष्ट सहते हुए वह हिमालय में मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पहुँचा। महर्षि के आदेश पर उसने आषाढ़ कृष्ण एकादशी (योगिनी) का श्रद्धापूर्वक व्रत किया, जिससे उसका कुष्ठ रोग शांत हुआ और वह पुनः अपने दिव्य स्वरूप में लौट आया।
【फलश्रुति】
योगिनी एकादशी का व्रत अट्ठासी हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान फल देता है और असाध्य चर्म व शारीरिक रोगों को नष्ट कर आत्मशुद्धि प्रदान करता है।
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